70 साल का हुआ तिरंगा

हमारी स्वतंत्रता का प्रतीक राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा आज के दिन 70 साल का हो गया। सन् 1947 में 22 जुलाई को संविधान सभा ने पिंगली वैंकैय्या द्वारा बनाये गये ध्वज को राष्ट्रीय ध्वज का दर्जा दिया था।

आज़ादी से पहले अपनाये गये इस ध्वज को देश के संविधान लागू होने तक के लिये अपनाया गया था।
लेकिन संविधान लागू होने के साथ-साथ भारतीय गणतंत्र ने तिरंगे को सदा के लिये राष्ट्रीय ध्वज के रूप में अपना लिया। चूँकि अंग्रेजों के शासन से पहले हमारा देश कई अलग अलग राज्यों और रियासतों में बंटा था इसलिए इसका कोई निश्चित राष्ट्रीय ध्वज नहीं था। राष्ट्रीय ध्वज की परिकल्पना किसी भी राष्ट्र के लिये बेहद अहम् होती है। राष्ट्रीय ध्वज का होना उस राष्ट्र की स्वतंत्रता का प्रतीक है। हमारा राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा भी कई बदलावों से होकर गुजरा है।

पहली बार 7 अगस्त 1906 को कोलकाता में एक ध्वज फहराया गया था जो लाल, पीले और हरे रंग की क्षैतिज पट्टियों से बनाया गया था। उसके एक साल बाद सन् 1907 में कुछ निर्वासित क्रांतिकारियों ने पेरिस में एक ध्वज फहराया जो की रंग और आकार में 1906 में कोलकाता में फहराये गये ध्वज जैसा ही था लेकिन उसकी उपरी पट्टी में एक कमल और सात तारे प्रदर्शित किये गये थे जो कि सप्त ऋषियों का प्रतीक माने गये थे।

फिर 1917 में तीसरा ध्वज फहराया गया। इस ध्वज को लोकमान्य तिलक और डॉ. एनी बेसेंट ने फहराया था। इस ध्वज में 5 लाल और 4 हरी क्षैतिज पट्टियां एक के बाद एक लगायी गयी थीं और सप्तऋषि के अभिविन्यास में इस पर बने सात सितारे थे। बांयी और ऊपरी किनारे पर यूनियन जैक (ब्रिटिश ध्वज) था। साथ ही एक कोने में सफेद अर्धचंद्र और सितारा भी था।